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Showing posts from July, 2021

जैसे को तैसा:

जैसे को तैसा: जैसे को तैसा लोमड़ी के कारनामों से भरपूर हमने अनेक कहानियाँ पढ़ी हैं। लोमड़ी हमेशा कुछ- न - कुछ बुरा ही करने की सोचती है। एक बार लोमड़ी ने सारस को अपने घर भोज जा निमंत्रण दिया। सारस ने ख़ुशी-ख़ुशी लोमड़ी का निमंत्रण स्वीकार कर लिया। सारस ने मन-ही-मन एक विशेष प्रकार के भोज के सपने देखने आरम्भ कर दिए। सारस सोच रहा था कि लोमड़ी सचमुच स्वादिष्ट भोजन उसके सामने परोसेगी। सारस का विचार था कि शीघ्र ही उसे स्वादिष्ट मछलियाँ और केकड़े खाने को मिलेंगे। आखिर वह दिन आ ही गया जब सारस भोज के लिए लोमड़ी के घर गया। सारस को देखते ही लोमड़ी ने मुस्कुराते हुए कहा―'आओ मित्र, सारस! यहाँ पधारने के लिए तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया।' इसके बाद सारस को लोमड़ी एक चौड़े- उथले बर्तन के पास ले गई, जिसमें बहुत स्वादिष्ट सूप भरा हुआ था।सूप को देखते ही सारस के मुख में पानी आ गया और उसने थोड़ा-सा सूप अपनी चोंच में भर लिया। फिर सारस ने चोंच को ऊपर करके सूप को गले से नीचे उतार लिया। तभी लोमड़ी ने भी सूप पीना शुरू कर दिया और सारा सूप समाप्त कर डाला। बेचारे सारस को थोड़ा-सा ही सूप नसीब हुआ। लोमड़ी ने सारस को अपना रुमाल ...

बिल भिजवा देता हूँ! :

बिल भिजवा देता हूँ! : बिल भिजवा देता हूँ!  एक डॉक्टर साहब एक पार्टी में गए अपने बीच शहर के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर को पाकर लोगों ने उन्हें घेर लिया किसी को जुकाम था तो किसी के पेट में गैस सभी मुफ्त की राय लेने के चक्कर में थे शिष्टाचारवश डॉक्टर साहब किसी को मना नहीं कर पा रहे थे!   उसी पार्टी में शहर के एक नामी वकील भी आए हुए थे मौका मिलते ही डॉक्टर साहब वकील साहब के पास पहुंचे और उन्हें एक ओर ले जाकर बोले यार मैं तो परेशान हो गया हूं सभी फ्री में इलाज कराने के चक्कर में हैं तुम्हें भी ऐसे लोग मिलते हैं क्या?   वकील साहब बहुत मिलते हैं!   डॉक्टर साहब तो फिर उनसे कैसे निपटते हो?   वकील साहब बिलकुल सीधा तरीका है मैं उन्हें सलाह देता हूं जैसा कि वो चाहते हैं बाद में उनके घर बिल भिजवा देता हूं!   यह बात डॉक्टर साहब को कुछ जम गई अगले रोज उन्होंने भी पार्टी में मिले कुछ लोगों के नाम बिल बनाए और उन्हें भिजवाने ही वाले थे कि तभी उनका नौकर अन्दर आया और बोला साहब, कोई आपसे मिलना चाहता है!   डॉक्टर साहब.... कौन है?  नौकर वकील साहब का चपरासी है कहता है कल रात पा...

नकली नोट :

Writer:- SHIVANSH PANDEY.................. नकली नोट  : नकली नोट एक आदमी नकली नोट छपता था . एक दिन गलती से उसने पंद्रह रूपये की एक नोट छाप दी.. अब पंद्रह रूपये की नोट आती तो हैं नहीं ..   उसने बहुत सोचा - “शहर में तो सब समझदार लोग होते हैं . अगर ये नोट यहाँ चलाने गया तो मैं पकड़ा जाऊंगा. हाँ अगर किसी दूर दराज़ के गाँव में गया तो शायद ये चल जाए .. “    ये सोच कर वो बहुत  दूर बसे एक छोटे से गाँव में गया ..   उसने देखा की लोहार लोहे की धौकनी में काम कर रहा हैं ..     उसने लोहार से कहा - “अरे भाई ! मेरे एक नोट का छुट्टा करा दो .. “  ये कहके उसने पंद्रह रुपये का नोट आगे बढ़ा दिया …   लोहार ने अपना हाँथ पोंछा और नोट को पकड़ कर देखने लगा … साथ ही साथ उसने नोट छापने वाले को भी एक नज़र देखा ..  उस आदमी की तो हलक सुख गयी … उसे लगा  “लगता है लोहार ने पकड़ लिया …”  लोहार बोला - “भाई जी ! मेरे पास पंद्रह रूपये शायद ना हो .. मैं चौदह रूपये दे सकता हूँ “  नोट छापने वाले ने सोचा - “अरे चलो मेरा क्या जाता है .. चौदह ही सह...

कुत्ते की दुम सीधी:

Writer:- SHIVANSH PANDEY................. कुत्ते की दुम सीधी: कुत्ते की दुम सीधी एक दिन राजा कृष्णदेव राय के दरबार में इस बात पर गरमागरम बहस हो रही थी कि मनुष्य का स्वभाव बदला जा सकता है या नहीं। कुछ का कहना था कि मनुष्य का स्वभाव बदला जा सकता है। कुछ का विचार था कि ऐसा नहीं हो सकता, जैसे कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं हो सकती। राजा को एक विनोद सूझा। उन्होंने कहा, ‘बात यहाँ पहुँची कि अगर कुत्ते की दुम सीधी की जा सकती है, तो मनुष्य का स्वभाव भी बदला जा सकता है, नहीं तो नहीं बदला जा सकता।’ राजा ने फिर विनोद को आगे बढ़ाने की सोची, बोले, ‘ठीक है, आप लोग यह प्रयत्न करके देखिए।’ राजा ने दस चुने हुए व्यक्तियों को कुत्ते का एक-एक पिल्ला दिलवाया और छह मास के लिए हर मास दस स्वर्णमुद्राएँ देना निश्चित किया। इन सभी लोगों को कुत्तों की दुम सीधी करने का प्रयत्न करना था। इन व्यक्तियों में एक तेनालीराम भी था। शेष नौ लोगों ने इन छह महीनों में पिल्लों की दुम सीधी करने की बड़ी कोशिश कीं। एक ने पिल्ले की पूँछ के छोर को भारी वजन से दबा दिया ताकि इससे दुम सीधी हो जाए। दूसरे ने पिल्ले की दुम को पीतल की एक सीधी ...

स्कूल का निरिक्षण - डबल रोले :

Writer:- SHIVANSH PANDEY................. स्कूल का निरिक्षण  - डबल रोले : स्कूल का निरिक्षण  - डबल रोले  एक सरकारी स्कूल का इंस्पेक्शन करने शिक्षा अधिकारी आये हुए थे .   एक क्लास में आए और बच्चो से पूछा - “इस क्लास में कौन छात्र एग्जाम में फर्स्ट आया था ?”  मोहन ने हाँथ उठाया .   शिक्षा अधिकारी - “वैरी गुड .. और सेकंड कौन आया था ?”  मोहन ने फिर से हाँथ उठाया .   शिक्षा अधिकारी - “अरे ! एग्जाम में फर्स्ट भी तुम ही आये और सेकंड भी तुम्ही आये ! ये कैसे हो सकता है?”  मोहन - “दरसल सर ! फर्स्ट तो राम आया था , पर वो बगल के गाँव में T20 क्रिकेट मैच देखने गया हैं, इस लिए आज स्कूल नहीं आया . मैं उसके दरपर अटेंडेंस दे रहा हूँ . “    शिक्षा अधिकारी आग बबूला हो गए और क्लास टीचर से बोले -”ये क्या मास्टर साहब ! आपके क्लास में क्या हो रहा हैं?”  मास्टर साहब बोले - “दरसल सर ! मैं तो दुसरे क्लास का क्लास टीचर हूँ . इस क्लास के क्लास टीचर बगल के गाँव में T20 क्रिकेट मैच देखने गए हैं, इस लिए आज स्कूल नहीं आये . मैं उसके दरपर ड्यूटी ...

स्कूल का निरिक्षण - इंग्लिश विन्ग्लिश:

Writer-: SHIVANSH PANDEY...... स्कूल का निरिक्षण  - इंग्लिश विन्ग्लिश: स्कूल का निरिक्षण  - इंग्लिश विन्ग्लिश एक सरकारी स्कूल का इंस्पेक्शन करने शिक्षा अधिकारी आये हुए थे .    एक क्लास में गए और ब्लाक्बोर्ड पर लिखा “NATURE” (इसे नेचर पढ़ते हैं ) और बच्चो से पूछा - बच्चो क्या तुम लोग इससे पढ़ सकते हो !   सारे के सारे बच्चो नो हाँथ खड़ा कर दिया - सर मैं ! सर मैं ! - कह के उठने लगे .   शिक्षा अधिकारी को बहुत अच्छा लगा - वो बहुत इम्प्रेस हुए . एक बच्चे से पुछा, लड़के ने बोला - सर ये हैं नटूरे !   शिक्षा अधिकारी भौचक्के हो गए और दुसरे लड़के से पूछा , फिर तीसरे , चौथे … सबने कहा - नटूरे !  शिक्षा अधिकारी गुस्सा के आग बबूला हो गए - मास्टर साहब ये क्या उल्टा सीधा पढ़ा रखा है !! ये सब नेचर को नटूरे बोल रहे हैं !!   मास्टर साहब - अरे जनाब ! बच्चे है - मटूरे नहीं हुए हैं , जब मटूरे हो जायेंगे तब सीख जायेंगे !   (मास्टर साहब MATURE मेच्योर  को मटूरे  कह रहे थे )     शिक्षा अधिकारी गुस्से से वहा से निकले और...

आदमी एक रूपये तीन :

Writer;- SHIVANSH PANDEY............................. आदमी एक रूपये तीन : आदमी एक रूपये तीन; एक बार बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा, "क्या तुम हमें तीन तरह की खूबियां एक ही आदमी में दिखा सकते हो?" "जी हुजूर, पहली तोते की, दूसरी शेर की, तीसरी गधे की। परन्तु आज नहीं, कल।" बीरबल ने कहा। "ठीक है, तुम्हें कल का समय दिया जाता है", बादशाह ने इजाजत देते हुए कहा। अगले दिन बीरबल एक व्यक्ति को पालकी में डालकर लाया और उसे पालकी से बाहर निकाला। फिर उस आदमी को शराब का एक पैग दिया। शराब पीकर वह आदमी डरकर बादशाह से विनती करने लगा- "हुजूर! मुझे माफ कर दो। मैं एक बहुत गरीब आदमी हूं।" बीरबल ने बादशाह को बताया, "यह तोते की बोली है" कुछ देर बाद उस आदमी को एक पैग और दिया तो वह नशे में बादशाह से बोला, "अरे जाओ, तुम दिल्ली के बादशाह हो तो क्या, हम भी अपने घर के बादशाह हैं। हमें ज्यादा नखरे मत दिखाओ" बीरबल ने बताया, "यह शेर की बोली है", कुछ देर बाद उस आदमी को एक पैग और दिया तो वह नशे में एक तरफ गिर गया और नशे में ऊटपटांग बड़बड़ाने लगा। बीरबल ने...

अब तो आन पड़ी है :

  अब तो आन पड़ी है : अब तो आन पड़ी है अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा- ”आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।” सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी। बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी, ”तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।” उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-”यह सब क्या है ?” सेठों के मुखिया ने कहा- ”जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?” बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।

आपस की फूट:

Writer; SHIVANSH PANDEY आपस की फूट: आपस की फूट प्राचीन समय में एक विचित्र पक्षी रहता था। उसका धड एक ही था, परन्तु सिर दो थे नाम था उसका भारुंड। एक शरीर होने के बावजूद उसके सिरों में एकता नहीं थी और न ही था तालमेल। वे एक दूसरे से बैर रखते थे। हर जीव सोचने समझने का काम दिमाग से करता हैं और दिमाग होता हैं सिर में दो सिर होने के कारण भारुंड के दिमाग भी दो थे। जिनमें से एक पूरब जाने की सोचता तो दूसरा पश्चिम फल यह होता था कि टांगें एक कदम पूरब की ओर चलती तो अगला कदम पश्चिम की ओर और भारूंड स्वयं को वहीं खडा पाता ता। भारुंड का जीवन बस दो सिरों के बीच रस्साकसी बनकर रह गया था। एक दिन भारुंड भोजन की तलाश में नदी तट पर धूम रहा था कि एक सिर को नीचे गिरा एक फल नजर आया। उसने चोंच मारकर उसे चखकर देखा तो जीभ चटकाने लगा “वाह! ऐसा स्वादिष्ट फल तो मैंने आज तक कभी नहीं खाया। भगवान ने दुनिया में क्या-क्या चीजें बनाई हैं।” “अच्छा! जरा मैं भी चखकर देखूं।” कहकर दूसरे ने अपनी चोंच उस फल की ओर बढाई ही थी कि पहले सिर ने झटककर दूसरे सिर को दूर फेंका और बोला “अपनी गंदी चोंच इस फल से दूर ही रख। यह फल मैंने पाया हैं ...

अक्लमंद हंस

अक्लमंद हंस एक बहुत बडा विशाल पेड था। उस पर बीसीयों हंस रहते थे। उनमें एक बहुत स्याना हंस था,बुद्धिमान और बहुत दूरदर्शी। सब उसका आदर करते ‘ताऊ’ कहकर बुलाते थे। एक दिन उसने एक नन्ही-सी बेल को पेड के तने पर बहुत नीचे लिपटते पाया। ताऊ ने दूसरे हंसों को बुलाकर कहा “देखो,इस बेल को नष्ट कर दो। एक दिन यह बेल हम सबको मौत के मुंह में ले जाएगी।” एक युवा हंस हंसते हुए बोला “ताऊ, यह छोटी-सी बेल हमें कैसे मौत के मुंह में ले जाएगी?” स्याने हंस ने समझाया “आज यह तुम्हें छोटी-सी लग रही हैं। धीरे-धीरे यह पेड के सारे तने को लपेटा मारकर ऊपर तक आएगी। फिर बेल का तना मोटा होने लगेगा और पेड से चिपक जाएगा, तब नीचे से ऊपर तक पेड पर चढने के लिए सीढी बन जाएगी। कोई भी शिकारी सीढी के सहारे चढकर हम तक पहुंच जाएगा और हम मारे जाएंगे।” दूसरे हंस को यकीन न आया “एक छोटी सी बेल कैसे सीढी बनेगी?” तीसरा हंस बोला “ताऊ, तु तो एक छोटी-सी बेल को खींचकर ज्यादा ही लम्बा कर रहा है।” एक हंस बडबडाया “यह ताऊ अपनी अक्ल का रौब डालने के लिए अंट-शंट कहानी बना रहा हैं।” इस प्रकार किसी दूसरे हंस ने ताऊ की बात को गंभीरता से नहीं लिया। इतनी ...

एकता का बल:

एकता का बल: एकता का बल एक समय की बात हैं कि कबूतरों का एक दल आसमान में भोजन की तलाश में उडता हुआ जा रहा था। गलती से वह दल भटककर ऐसे प्रदेश के ऊपर से गुजरा, जहां भयंकर अकाल पडा था। कबूतरों का सरदार चिंतित था। कबूतरों के शरीर की शक्ति समाप्त होती जा रही थी। शीघ्र ही कुछ दाना मिलना जरुरी था। दल का युवा कबूतर सबसे नीचे उड रहा था। भोजन नजर आने पर उसे ही बाकी दल को सुचित करना था। बहुत समय उडने के बाद कहीं वह सूखाग्रस्त क्षेत्र से बाहर आया। नीचे हरियाली नजर आने लगी तो भोजन मिलने की उम्मीद बनी। युवा कबूतर और नीचे उडान भरने लगा। तभी उसे नीचे खेत में बहुत सारा अन्न बिखरा नजर आया “चाचा, नीचे एक खेत में बहुत सारा दाना बिखरा पडा हैं। हम सबका पेट भर जाएगा।’ सरदार ने सूचना पाते ही कबूतरों को नीचे उतरकर खेत में बिखरा दाना चुनने का आदेश दिया। सारा दल नीचे उतरा और दाना चुनने लगा। वास्तव में वह दाना पक्षी पकडने वाले एक बहलिए ने बिखेर रखा था। ऊपर पेड पर तना था उसका जाल। जैसे ही कबूतर दल दाना चुगने लगा, जाल उन पर आ गिरा। सारे कबूतर फंस गए। कबूतरों के सरदार ने माथा पीटा “ओह! यह तो हमें फंसाने के लिए फैलाया ...

हमारे पंजाब में :हमारे पंजाब में

हमारे पंजाब में : हमारे पंजाब में सरदार जी पहली बार अपने लड़के मोंटी को स्कूटर पर घुमाने निकले .   रास्ते मैं अंगूर दिखा .  मोंटी चिल्लाया - पापा पापा !! अंगूर खाना हैं !   सरदार जी - हुह ! हमारे पंजाब में तो बड्डे बड्डे अंगूर मिलते हैं ! ये तो अंगूरी हैं अंगूरी !  और आगे बढ़ गए .     रास्ते मैं सेब दिखा .  मोंटी चिल्लाया - पापा पापा !! सेब खाना हैं !   सरदार जी - हुह ! हमारे पंजाब में तो बड्डे बड्डे सेब मिलते हैं ! ये तो सेबी हैं सेबी !  और आगे बढ़ गए .      रास्ते मैं केला दिखा .  मोंटी चिल्लाया - पापा पापा !! केला खाना हैं !   सरदार जी - हुह ! हमारे पंजाब में तो बड्डे बड्डे केला मिलते हैं ! ये तो केली हैं केली !  और आगे बढ़ गए .      रास्ते मैं समोसा दिखा .  मोंटी चिल्लाया - पापा पापा !! समोसा खाना हैं !   सरदार जी - हुह ! हमारे पंजाब में तो बड्डे बड्डे समोसा मिलते हैं ! ये तो समोसी हैं समोसी !    करते करते वो मोंटी तो लेकर वापस आ गए और कुछ...

कुएं का विवाह:

कुएं का विवाह: कुएं का विवाह एक बार राजा कॄष्णदेव राय और तेनालीराम के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। तेनालीराम रुठकर चले गए। आठ-दस दिन बीते, तो राजा का मन उदास हो गया। राजा ने तुरन्त सेवको को तेनालीराम को खोजने भेजा। आसपास का पूरा क्षेत्र छान लिया पर तेनालीराम का कहीं अता-पता नहीं चला। अचानक राजा को एक तरकीब सूझी। उसने सभी गांवों में मुनादी कराई राजा अपने राजकीय कुएं का विवाह रचा रहे हैं, इसलिए गांव के सभी मुखिया अपने-अपने गांव के कुओं को लेकर राजधानी पहुंचे। जो आदमी इस आज्ञा का पालन नहीं करेगा, उसे जुर्माने में एक हजार स्वर्ण मुद्राएं देनी होंगी। मुनादी सुनकर सभी परेशान हो गए। भला कुएं भी कहीं लाए-ले जाए जा सकते हैं। जिस गांव में तेनालीराम भेष बदलकर रहता था, वहां भी यह मुनादी सुनाई दी। गांव का मुखिया परेशान था। तेनालीराम समझ गए कि उसे खोजने के लिए ही महाराज ने यह चाल चली हैं। तेनालीराम ने मुखिया को बुलाकर कहा “मुखियाजी, आप चिंता न करें, आपने मुझे गांव में आश्रय दिया हैं, इसलिए आपके उपकार का बदला में चुकाऊंगा। मैं एक तरकीब बताता हूं आप आसपास के मुखियाओं को इकट्ठा करके राजधानी की ओर...

डॉक्टर और बीमार चंदू मियां

डॉक्टर और बीमार चंदू मियां: डॉक्टर और बीमार चंदू मियां डॉक्टर बीमार चंदू मियां से-कैसी तबीयत है मियां?  चंदू मियां-ठीक होती तो आपके पास काहे आते..  डॉक्टर-मैंने जो दवा दी थी वो खा ली थी।  चंदू मियां-कैसी बातें करते हैं, दवा तो बोतल में भरी हुई थी। खाली काहे होगी?  डॉक्टर-अमा, मेरा मतलब है, दवा पी ली थी।  चंदू मियां-क्या कह रहे हैं, आपने ही तो दी थी दवा पीली नहीं लाल थी।  डॉक्टर-अबे मेरा मतलब है दवा को पी लिया था?  चंदू मियां-डॉक्टर साहब अपना इलाज कराओ दवा को नहीं मुझे पीलिया था।  डॉक्टर सिर पीटते हुए-तू मुझे पागल कर देगा।  चंदू मियां-मेरी नजर में पागलों का एक उम्दा डॉक्टर है।  डॉक्टर-मेरे बाप यहां से जाने का क्या लेगा।  चंदू- बस 500 रुपए दे दो।  डॉक्टर- ये ले 700 और दफा हो जा।  चंदू- डॉक्टर साहब अगली बार दिखाने कब आना है!  डॉक्टर- कोई जरूरत नहीं, तू बिल्कुल ठीक है।  चंदू- मैं ठीक हूं तो फिर तुमने मुझे पलंग पर लिटाकर शर्ट उतरवाकर सांस लेने को क्यों कहा।  डॉक्टर-मैं तुम्हारा चेकअप कर रहा था।  चंदू-जब मैं ...

रेलवे इंटरव्यू:;

                                   रेलवे इंटरव्यू  : रेलवे इंटरव्यू  मोहन रेलवे गार्ड की भर्ती में गया और रिटेन इक्जाम पास करके इंटरव्यू राउंड में पहुच गया ..    इंटरव्यू के दिन वो तैयार होके पंहुचा .    इंटरव्यूवर - मानलो तुम स्टेशन के गार्ड हो और तुम देखते हो की दो ट्रेने  एक ही पटरी पर हैं और  तेज़ी से एक दुसरे की ओर बढ़ी जा रही हैं … तुमको पता है की अगर कुछ नहीं किया गया तो एक तेज़ टक्कर हो जायेगी …ऐसी स्थिति में  तुम क्या करोगे ?  मोहन - मैं लाल झंडा लहराऊंगा ..  इंटरव्यूवर - मानलो तुम्हारे पास लाल झंडा नहीं है. तब ?             मोहन - नो प्रॉब्लम … मैं हमेशा लाल रंग की चड्डी पहनता हु … तो .. मैं उसे लहरा सकता हु .. समझ रहे हैं ना सर ?  इंटरव्यूवर - पर रात का वक़्त हो तो ?  मोहन - नो प्रॉब्लम … मैं हमेशा लाल और हरे रंग का जलने वाला टोर्च अपने पास रखता हूँ … तो .. मैं उसे जला दूंगा ..  इंटरव्यूव...

पप्पू और टीचर सवाल जवाब

टीचर के सवाल पप्पू के जवाब! : टीचर के सवाल पप्पू के जवाब!  टीचर: टीपू सुल्‍तान की मृत्‍यु किस युद्ध में हुई थी?  पप्पू: उनके आखिरी युद्ध में।     टीचर: गंगा किस स्‍टेट में बहती है?  पप्पू: लिक्विड स्‍टेट में।    टीचर: महात्‍मा गांधी का जन्‍म कब हुआ था?   पप्पू: उनके जन्‍मदिन के दिन।    टीचर: 15 अगस्‍त को क्‍या होता है?   पप्पू: 15 अगस्‍त।    टीचर: 6 लोगों के बीच 8 आम कैसे बांटे?  पप्पू: मैंगो शेक बनाकर।  टीचर: अगर मेरे एक हाँथ में १० संतरे हो और दुसरे में उसके दुगने से पांच कम और मैं उनमे से तीन शीला को और दो मुन्नी को दे दिए तो मेरे पास क्या है ?   पप्पू: दो बहुत बड़े हाँथ जिसमे इतने सारे संतरे समा सकते है     टीचर: “एक दिन मेरा देश भ्रष्टाचार मुक्त होगा “ - ये किस टेंस (काल) का वाक्य है ?  पप्पू: फ्यूचर इम्पॉसिबल टेंस .    टीचर: राम की लम्बाई 5 फीट है और श्याम का घर उसके स्कूल से चार किलोमीटर दूर है , तो ये बताओ की मेरी उम्र क्या है ?  पप्पू: ४४ साल...