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जैसे को तैसा:

जैसे को तैसा: जैसे को तैसा लोमड़ी के कारनामों से भरपूर हमने अनेक कहानियाँ पढ़ी हैं। लोमड़ी हमेशा कुछ- न - कुछ बुरा ही करने की सोचती है। एक बार लोमड़ी ने सारस को अपने घर भोज जा निमंत्रण दिया। सारस ने ख़ुशी-ख़ुशी लोमड़ी का निमंत्रण स्वीकार कर लिया। सारस ने मन-ही-मन एक विशेष प्रकार के भोज के सपने देखने आरम्भ कर दिए। सारस सोच रहा था कि लोमड़ी सचमुच स्वादिष्ट भोजन उसके सामने परोसेगी। सारस का विचार था कि शीघ्र ही उसे स्वादिष्ट मछलियाँ और केकड़े खाने को मिलेंगे। आखिर वह दिन आ ही गया जब सारस भोज के लिए लोमड़ी के घर गया। सारस को देखते ही लोमड़ी ने मुस्कुराते हुए कहा―'आओ मित्र, सारस! यहाँ पधारने के लिए तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया।' इसके बाद सारस को लोमड़ी एक चौड़े- उथले बर्तन के पास ले गई, जिसमें बहुत स्वादिष्ट सूप भरा हुआ था।सूप को देखते ही सारस के मुख में पानी आ गया और उसने थोड़ा-सा सूप अपनी चोंच में भर लिया। फिर सारस ने चोंच को ऊपर करके सूप को गले से नीचे उतार लिया। तभी लोमड़ी ने भी सूप पीना शुरू कर दिया और सारा सूप समाप्त कर डाला। बेचारे सारस को थोड़ा-सा ही सूप नसीब हुआ। लोमड़ी ने सारस को अपना रुमाल ...
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बिल भिजवा देता हूँ! :

बिल भिजवा देता हूँ! : बिल भिजवा देता हूँ!  एक डॉक्टर साहब एक पार्टी में गए अपने बीच शहर के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर को पाकर लोगों ने उन्हें घेर लिया किसी को जुकाम था तो किसी के पेट में गैस सभी मुफ्त की राय लेने के चक्कर में थे शिष्टाचारवश डॉक्टर साहब किसी को मना नहीं कर पा रहे थे!   उसी पार्टी में शहर के एक नामी वकील भी आए हुए थे मौका मिलते ही डॉक्टर साहब वकील साहब के पास पहुंचे और उन्हें एक ओर ले जाकर बोले यार मैं तो परेशान हो गया हूं सभी फ्री में इलाज कराने के चक्कर में हैं तुम्हें भी ऐसे लोग मिलते हैं क्या?   वकील साहब बहुत मिलते हैं!   डॉक्टर साहब तो फिर उनसे कैसे निपटते हो?   वकील साहब बिलकुल सीधा तरीका है मैं उन्हें सलाह देता हूं जैसा कि वो चाहते हैं बाद में उनके घर बिल भिजवा देता हूं!   यह बात डॉक्टर साहब को कुछ जम गई अगले रोज उन्होंने भी पार्टी में मिले कुछ लोगों के नाम बिल बनाए और उन्हें भिजवाने ही वाले थे कि तभी उनका नौकर अन्दर आया और बोला साहब, कोई आपसे मिलना चाहता है!   डॉक्टर साहब.... कौन है?  नौकर वकील साहब का चपरासी है कहता है कल रात पा...

नकली नोट :

Writer:- SHIVANSH PANDEY.................. नकली नोट  : नकली नोट एक आदमी नकली नोट छपता था . एक दिन गलती से उसने पंद्रह रूपये की एक नोट छाप दी.. अब पंद्रह रूपये की नोट आती तो हैं नहीं ..   उसने बहुत सोचा - “शहर में तो सब समझदार लोग होते हैं . अगर ये नोट यहाँ चलाने गया तो मैं पकड़ा जाऊंगा. हाँ अगर किसी दूर दराज़ के गाँव में गया तो शायद ये चल जाए .. “    ये सोच कर वो बहुत  दूर बसे एक छोटे से गाँव में गया ..   उसने देखा की लोहार लोहे की धौकनी में काम कर रहा हैं ..     उसने लोहार से कहा - “अरे भाई ! मेरे एक नोट का छुट्टा करा दो .. “  ये कहके उसने पंद्रह रुपये का नोट आगे बढ़ा दिया …   लोहार ने अपना हाँथ पोंछा और नोट को पकड़ कर देखने लगा … साथ ही साथ उसने नोट छापने वाले को भी एक नज़र देखा ..  उस आदमी की तो हलक सुख गयी … उसे लगा  “लगता है लोहार ने पकड़ लिया …”  लोहार बोला - “भाई जी ! मेरे पास पंद्रह रूपये शायद ना हो .. मैं चौदह रूपये दे सकता हूँ “  नोट छापने वाले ने सोचा - “अरे चलो मेरा क्या जाता है .. चौदह ही सह...

कुत्ते की दुम सीधी:

Writer:- SHIVANSH PANDEY................. कुत्ते की दुम सीधी: कुत्ते की दुम सीधी एक दिन राजा कृष्णदेव राय के दरबार में इस बात पर गरमागरम बहस हो रही थी कि मनुष्य का स्वभाव बदला जा सकता है या नहीं। कुछ का कहना था कि मनुष्य का स्वभाव बदला जा सकता है। कुछ का विचार था कि ऐसा नहीं हो सकता, जैसे कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं हो सकती। राजा को एक विनोद सूझा। उन्होंने कहा, ‘बात यहाँ पहुँची कि अगर कुत्ते की दुम सीधी की जा सकती है, तो मनुष्य का स्वभाव भी बदला जा सकता है, नहीं तो नहीं बदला जा सकता।’ राजा ने फिर विनोद को आगे बढ़ाने की सोची, बोले, ‘ठीक है, आप लोग यह प्रयत्न करके देखिए।’ राजा ने दस चुने हुए व्यक्तियों को कुत्ते का एक-एक पिल्ला दिलवाया और छह मास के लिए हर मास दस स्वर्णमुद्राएँ देना निश्चित किया। इन सभी लोगों को कुत्तों की दुम सीधी करने का प्रयत्न करना था। इन व्यक्तियों में एक तेनालीराम भी था। शेष नौ लोगों ने इन छह महीनों में पिल्लों की दुम सीधी करने की बड़ी कोशिश कीं। एक ने पिल्ले की पूँछ के छोर को भारी वजन से दबा दिया ताकि इससे दुम सीधी हो जाए। दूसरे ने पिल्ले की दुम को पीतल की एक सीधी ...

स्कूल का निरिक्षण - डबल रोले :

Writer:- SHIVANSH PANDEY................. स्कूल का निरिक्षण  - डबल रोले : स्कूल का निरिक्षण  - डबल रोले  एक सरकारी स्कूल का इंस्पेक्शन करने शिक्षा अधिकारी आये हुए थे .   एक क्लास में आए और बच्चो से पूछा - “इस क्लास में कौन छात्र एग्जाम में फर्स्ट आया था ?”  मोहन ने हाँथ उठाया .   शिक्षा अधिकारी - “वैरी गुड .. और सेकंड कौन आया था ?”  मोहन ने फिर से हाँथ उठाया .   शिक्षा अधिकारी - “अरे ! एग्जाम में फर्स्ट भी तुम ही आये और सेकंड भी तुम्ही आये ! ये कैसे हो सकता है?”  मोहन - “दरसल सर ! फर्स्ट तो राम आया था , पर वो बगल के गाँव में T20 क्रिकेट मैच देखने गया हैं, इस लिए आज स्कूल नहीं आया . मैं उसके दरपर अटेंडेंस दे रहा हूँ . “    शिक्षा अधिकारी आग बबूला हो गए और क्लास टीचर से बोले -”ये क्या मास्टर साहब ! आपके क्लास में क्या हो रहा हैं?”  मास्टर साहब बोले - “दरसल सर ! मैं तो दुसरे क्लास का क्लास टीचर हूँ . इस क्लास के क्लास टीचर बगल के गाँव में T20 क्रिकेट मैच देखने गए हैं, इस लिए आज स्कूल नहीं आये . मैं उसके दरपर ड्यूटी ...

स्कूल का निरिक्षण - इंग्लिश विन्ग्लिश:

Writer-: SHIVANSH PANDEY...... स्कूल का निरिक्षण  - इंग्लिश विन्ग्लिश: स्कूल का निरिक्षण  - इंग्लिश विन्ग्लिश एक सरकारी स्कूल का इंस्पेक्शन करने शिक्षा अधिकारी आये हुए थे .    एक क्लास में गए और ब्लाक्बोर्ड पर लिखा “NATURE” (इसे नेचर पढ़ते हैं ) और बच्चो से पूछा - बच्चो क्या तुम लोग इससे पढ़ सकते हो !   सारे के सारे बच्चो नो हाँथ खड़ा कर दिया - सर मैं ! सर मैं ! - कह के उठने लगे .   शिक्षा अधिकारी को बहुत अच्छा लगा - वो बहुत इम्प्रेस हुए . एक बच्चे से पुछा, लड़के ने बोला - सर ये हैं नटूरे !   शिक्षा अधिकारी भौचक्के हो गए और दुसरे लड़के से पूछा , फिर तीसरे , चौथे … सबने कहा - नटूरे !  शिक्षा अधिकारी गुस्सा के आग बबूला हो गए - मास्टर साहब ये क्या उल्टा सीधा पढ़ा रखा है !! ये सब नेचर को नटूरे बोल रहे हैं !!   मास्टर साहब - अरे जनाब ! बच्चे है - मटूरे नहीं हुए हैं , जब मटूरे हो जायेंगे तब सीख जायेंगे !   (मास्टर साहब MATURE मेच्योर  को मटूरे  कह रहे थे )     शिक्षा अधिकारी गुस्से से वहा से निकले और...

आदमी एक रूपये तीन :

Writer;- SHIVANSH PANDEY............................. आदमी एक रूपये तीन : आदमी एक रूपये तीन; एक बार बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा, "क्या तुम हमें तीन तरह की खूबियां एक ही आदमी में दिखा सकते हो?" "जी हुजूर, पहली तोते की, दूसरी शेर की, तीसरी गधे की। परन्तु आज नहीं, कल।" बीरबल ने कहा। "ठीक है, तुम्हें कल का समय दिया जाता है", बादशाह ने इजाजत देते हुए कहा। अगले दिन बीरबल एक व्यक्ति को पालकी में डालकर लाया और उसे पालकी से बाहर निकाला। फिर उस आदमी को शराब का एक पैग दिया। शराब पीकर वह आदमी डरकर बादशाह से विनती करने लगा- "हुजूर! मुझे माफ कर दो। मैं एक बहुत गरीब आदमी हूं।" बीरबल ने बादशाह को बताया, "यह तोते की बोली है" कुछ देर बाद उस आदमी को एक पैग और दिया तो वह नशे में बादशाह से बोला, "अरे जाओ, तुम दिल्ली के बादशाह हो तो क्या, हम भी अपने घर के बादशाह हैं। हमें ज्यादा नखरे मत दिखाओ" बीरबल ने बताया, "यह शेर की बोली है", कुछ देर बाद उस आदमी को एक पैग और दिया तो वह नशे में एक तरफ गिर गया और नशे में ऊटपटांग बड़बड़ाने लगा। बीरबल ने...